एक नए सृजन के लिए……सी. एम. शर्मा (बब्बू) …

सावन में भी…..
एक पेड़ ठूंठ सा निर्जन खड़ा है….
किसी को उसकी काया से भय लगता है…
कोई अपशगुन समझ…
उसके सर से तेल उतारता है….
तो कोई धुप बत्ती कर रहा है….
किसी को उसपे दया आती है….
तो जल अर्पण कर देता है….

पर ना जाने क्यूँ मुझे ऐसे लगता है….
कि वो सब आडम्बर त्याग कर…
अंतर्मुखी हो गया है….
ऊर्जा संजो रहा है…..
अपने को त्यार कर रहा है…
एक नए सृजन के लिए……

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/सी. एम. शर्मा (बब्बू) …

20 Comments

  1. mani 23/07/2016
    • C.m.sharma(babbu) 23/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" 23/07/2016
    • C.m.sharma(babbu) 23/07/2016
    • C.m.sharma(babbu) 23/07/2016
  3. Kajalsoni 23/07/2016
    • C.m.sharma(babbu) 23/07/2016
  4. Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 23/07/2016
    • C.m.sharma(babbu) 23/07/2016
  5. सोनित 23/07/2016
    • C.m.sharma(babbu) 24/07/2016
  6. निवातियाँ डी. के. 23/07/2016
    • C.m.sharma(babbu) 24/07/2016
  7. Meena bhardwaj 23/07/2016
    • C.m.sharma(babbu) 24/07/2016
  8. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 23/07/2016
    • C.m.sharma(babbu) 24/07/2016
  9. sarvajit singh 24/07/2016
    • C.m.sharma(babbu) 24/07/2016

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