माला शब्दों. की

कैसे. कान्हा. तुझे प्यार. करूँ
है माला शब्दों की
जिससे मैं. श्रृंगगर करूँ
देखूं तुझको तो
तेरे नयनों में मैं खो जाऊं
देख प्यारा मुखड़ा तेरा
शब्दों में उलझ मैं रह जाऊं
शयाम वर्ण लागे अति न्यारा
उसपर. कारी कजरारी. आँखें
भोला मुखड़ा देख 2 मैं मुस्काउं
रंग पीताम्बर सोहे मुझको
मुरली की धुन मोहे मुझको
सुन के मगन मैं हो जाऊं
रास रचाए तू सपनों में ऐसे
बंद पलकों में तेरे दर्शन पाऊं
दुनिआ के सुख ये सारे
चरणों में तेरे सब पा जाऊं
मेले दुनिआ के बड़े निराले
हैं फंसने के भी लाख बहाने
पर क्षणिक. हैं सुख ये सारे
भूलूँ सब तेरा साथ जो पाऊं
बाजे पायल रुन झुन २
उतरे मन में उसकी. गुंजन
करें विभोर तेरी सारी बातें
हो रात सुहानी ,मीठी बरसातें
न जाने क्यों लागे तू अपना
है हकीकत नहीं कोई सपना
रस जीवन का बिखिर गया है
तेरे चरणों में ही सिमट गया है
भेद क्या है झूट और सच में
समझ २. मैं समझ न पाऊं
पर मैं जानूं जो मैं चाहूँ
तेरे चरणों में मैं पा जाऊं

16 Comments

  1. C.m.sharma(babbu) 22/07/2016
    • kiran kapur gulati 23/07/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 22/07/2016
    • kiran kapur gulati 23/07/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/07/2016
    • kiran kapur gulati 23/07/2016
  4. sarvajit singh 22/07/2016
    • kiran kapur gulati 23/07/2016
  5. सोनित 23/07/2016
    • kiran kapur gulati 23/07/2016
  6. Shishir "Madhukar" 23/07/2016
    • kiran kapur gulati 23/07/2016
  7. mani 23/07/2016
    • kiran kapur gulati 23/07/2016
    • kiran kapur gulati 23/07/2016

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