अल्फाज़-ए-मोहब्बत

“हुकुम कर के चले वो ऐ बशर तू भूल जा मुझको…
रसूलों से मोहब्बत की तेरी औकात ही क्या है…
मगर हम भी मोहब्बत के बड़े पक्के खिलाडी हैं…
खुदा को मात देते है..तुम्हारी बात ही क्या है…”
-सोनित

20 Comments

  1. Kajalsoni 22/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" 22/07/2016
  3. mani 22/07/2016
  4. C.m.sharma(babbu) 22/07/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/07/2016
  6. Dr Chhote Lal Singh 22/07/2016
  7. निवातियाँ डी. के. 22/07/2016
  8. sarvajit singh 22/07/2016
  9. Meena bhardwaj 23/07/2016

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