जिन्दा लाश:-विजय

हर कोई मुझसे चाहे बस इतना
पूरा करू मैं उनका सपना
पर कोई मुझसे ये न पूछे
तू क्या चाहे जीवन में अपना

बयां करते है सब दर्द अब अपना
कहते तू ही है हर्ष अब अपना
पर कोई मुझमे ये न देखे
जख्मो से कितना भरा है सीना अपना

बोझ है कांधे पर उनकी उम्मीदों का
कहते है तू पहचान है मेरी जीतो का
पर कोई मुझसे ये न पूछे
क्या हारा बदले इन जीतो का

कहते है तू आस है मेरी
जीवन की तू सांस है मेरी
पर कोई मुझसे ये न पूछे
जिन्दा है या लाश है तेरी.
By:-VIJAY

16 Comments

  1. सोनित 23/07/2016
    • vijaykr811 28/07/2016
  2. Savita Verma 23/07/2016
    • vijaykr811 06/03/2017
  3. mani 23/07/2016
    • vijaykr811 28/07/2016
  4. Kajalsoni 23/07/2016
    • vijaykr811 06/03/2017
  5. निवातियाँ डी. के. 23/07/2016
    • vijaykr811 28/07/2016
    • vijaykr811 06/03/2017
  6. C.m.sharma(babbu) 23/07/2016
    • vijaykr811 28/07/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 23/07/2016
    • vijaykr811 28/07/2016

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