मेरा कमाया धन………….मनिंदर सिंह “मनी”

कैसा मुकाम है जिंदगी का,
तन्हाई मिटा न सकी शौहरत,
मुस्कराहट, अपनों का प्यार,
सकून खरीद ना सकी दौलत,
कागजो का ढेर, हस रही, मेरे,
घर की दीवारे बन कब्रस्तान,
तड़प रही रूह दर्द से,
धीरे धीरे टूट रहा अभिमान,
पलट दू कुछ बीती यादो के पन्ने,
वक्त देता नहीं मुझे अनुमोदन,
ना नज़रो में चमक, ना झेल,
सकता चाहतो की सरगर्मी तन,
सब कुछ जानकर भी, क्यों ?,
अनजान बन बैठा मेरा मन,
प्रतीत हो रहा जैसे घोट रहा,
दम ऐ “मनी” मेरा कमाया धन,

22 Comments

  1. RAJEEV GUPTA 22/07/2016
    • mani 22/07/2016
  2. Meena bhardwaj 22/07/2016
    • mani 22/07/2016
    • mani 22/07/2016
  3. Kajalsoni 22/07/2016
    • mani 22/07/2016
    • mani 22/07/2016
  4. babucm 22/07/2016
    • mani 22/07/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 22/07/2016
    • mani 22/07/2016
  6. Shishir "Madhukar" 22/07/2016
    • mani 23/07/2016
  7. sarvajit singh 22/07/2016
    • mani 23/07/2016
  8. RAJ KUMAR GUPTA 22/07/2016
    • mani 23/07/2016
  9. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/07/2016
    • mani 23/07/2016

Leave a Reply