अर्थज्ञान

जरुरी अर्थज्ञान बिना जीवन की नहीं बनेगी बात,
पत्नी भी फिर निकल लेगी किसी पडोसी के साथ,
चार दिन की चांदनी और फिर रहेगी अँधेरी रात,
धन नहीं रहे तो उपवास, धन रहे तो पकेगा भात,
आमदनी अठन्नी और रुपये खर्च की जब हो बात,
कभी नहीं जीवन संवरेगा, बिगड़े ही रहेंगे हालात,
जब पैसे ना हों जेब में तो देख लो अपनी औकात,
रिश्ते, मित्र, पडोसी सबके ही मिट जाते जज्बात,
मुद्रा प्रचलन में लाना जीवन को था सुगम बनाना,
अब ये है लोमड़ी की चाल, ओढ़ ली नानी की शाल,
याद रखो कुछ बातें, जीवन में नहीं कभी भुलाना,
आमदनी को शत-प्रतिशत तो कभी भी नहीं गंवाना,
संचय की जो नीति बनाता, विपदा से खुद बच जाता,
बूँद-बूँद से लोटा भरता, वक्त पर वही प्यास बुझाता ।

विजय कुमार सिंह
vijaykumarsinghblog.wordpress.com
Note : ब्लॉग पर तस्वीर के साथ देखें.

14 Comments

  1. mani 22/07/2016
  2. RAJEEV GUPTA 22/07/2016
  3. babucm 22/07/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 22/07/2016
  5. Shishir "Madhukar" 22/07/2016
  6. sarvajit singh 22/07/2016
  7. RAJ KUMAR GUPTA 22/07/2016
  8. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/07/2016

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