ये दिल तरसता है – गीत – सर्वजीत सिंह

सावन के महीने में एक पुराना गीत आपकी नज़र

ये दिल तरसता है

जब होती है बरसात बादल गरजता है
साजन तुझसे मिलने को ये दिल तरसता है
के याद आने लगी, के जान जाने लगी

सावन के महीने में क्यों चले गए परदेस
काँटों सी लगती है ये फूलों भरी सेज
आंसू ऐसे बहते हैं के गगन बरसता है
साजन तुझसे मिलने को ये दिल तरसता है
के याद आने लगी, के जान जाने लगी

मौसम भी ऐसा है के ये दिल तड़पाता है
रह-रह के तेरी यादों के सपने सजाता है
मीठी-मीठी हवाओं मैं जब दुपट्टा सरकता है
साजन तुझसे मिलने को ये दिल तरसता है
के याद आने लगी, के जान जाने लगी

अब तो तू आजा ज़ालिम ओर ना देर लगा
प्यार करने की मुझको इतनी ना दे सज़ा
तेरे ही इंतज़ार में अब हर पल गुज़रता है
साजन तुझसे मिलने को ये दिल तरसता है
के याद आने लगी, के जान जाने लगी

गीतकार : सर्वजीत सिंह
[email protected]

12 Comments

  1. अरुण कुमार तिवारी 22/07/2016
  2. sarvajit singh 22/07/2016
  3. C.m.sharma(babbu) 22/07/2016
    • sarvajit singh 22/07/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/07/2016
  5. sarvajit singh 22/07/2016
  6. Shishir "Madhukar" 22/07/2016
    • sarvajit singh 22/07/2016
  7. mani 22/07/2016
    • sarvajit singh 22/07/2016
  8. Kajalsoni 22/07/2016
    • sarvajit singh 22/07/2016

Leave a Reply