गर्दिशों की छाँव में………..मनिंदर सिंह “मनी”

गुजर रही जिंदगी गर्दिशों की छाँव में,
वक्त चुभो रहा मुश्किलो के काटे पांव में,
मंजिल दूर बहुत, चलते जाना है मुझे,
रोकने के लिए दिख रहा, जोर खिजाओ में,
कुरेद जख्म फिर चलता हु, मिले थे जो,
कभी बन उपहार अपनों की वफाओ में,
खतायें होती है अक्सर, मिटटी के पुतलो से,
बचना होगा गिरने से, सिर्फ अपनी निगाहों में,
लक्ष्य जीवन में साध, जिम्मेदारियों को उठा,
सजाना होगा अपने जीवन को, आशाओ से,

20 Comments

    • mani 21/07/2016
    • mani 21/07/2016
  1. babucm 21/07/2016
    • mani 21/07/2016
  2. Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 21/07/2016
    • mani 21/07/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 21/07/2016
    • mani 21/07/2016
  4. RAJEEV GUPTA 21/07/2016
    • mani 21/07/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 21/07/2016
    • mani 21/07/2016
  6. Kajalsoni 21/07/2016
    • mani 21/07/2016
  7. sarvajit singh 21/07/2016
    • mani 22/07/2016
  8. अरुण कुमार तिवारी 21/07/2016
    • mani 22/07/2016

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