सुनसान गलिया…………..मनिंदर सिंह “मनी”

थी तेरे दीदार-ऐ-सूरत का,
बहाना कभी सुनसान गलिया,
गवाही दे रही, तेरे इंतज़ार का,
आज वही सुनसान गलिया,
तेरी महक को जिन्दा रख,
मुझे महका रही, सुनसान गलिया,
छम छम करती,पायलों की आवाज़,
कानो में जिन्दा रखे, सुनसान गलिया,
तेरा शर्माना, झट से मुझ से लिपट जाना,
उन पलो को जिन्दा रखे, सुनसान गलिया,
मेरा घर भी यही, मेरी मंजिल भी यही,
हमारे इश्क की गवाह, सुनसान गलिया,

14 Comments

  1. C.m.sharma(babbu) 20/07/2016
    • mani 21/07/2016
  2. sarvajit singh 20/07/2016
    • mani 21/07/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 20/07/2016
    • mani 21/07/2016
  4. Shishir "Madhukar" 20/07/2016
    • mani 21/07/2016
  5. shrija kumari 20/07/2016
    • mani 21/07/2016
  6. निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
    • mani 21/07/2016
  7. mani 21/07/2016

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