मुर्दो में जान……………

कौन कहता है
मुर्दो में जान नहीं होती……..!!
हमने तो देखि है,
शहर में चलती फिरती जिन्दा लाशें !!
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अब न पूछना की इसका सबब तुम हमसे………..!
कितनो ने देखा है, उस अबला को…
दरिंदो के चंगुल से छुड़ाने की गुहार लगाते
और कितने बुजदिल गुजर गये
नजर छुपा के, दुम दबा के…………………!!
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जब कोई जवान शहीद होता सीमा पर
गर्व से सीना चौड़ा कर सब महिमा गाते
कभी अपने अंतर्मन से भी पूछा एक पल
बिन स्वार्थ के हम कितना फर्ज निभाते !!
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डी. के. निवातियाँ [email protected]@@

22 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 20/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
  2. mani 20/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
  3. babucm 20/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
  4. RAJEEV GUPTA 20/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
  5. Dr Chhote Lal Singh 20/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
  6. Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 20/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
  7. Meena bhardwaj 20/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
  8. Savita Verma 20/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
  9. sarvajit singh 20/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
  10. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 20/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 20/07/2016

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