व्हाट्स ऐप……..मनिंदर सिंह “मनी”

देर रात घर आ,
बेटे से मिलने ख्याल आया,
गया कमरे में धीरे से उसके,
मासूमियत से भरा चेहरा,
मेरे आँखों के सामने आया,
सीने से हटा किताब,
आँखों से ऐनक,
गाल पर उसके जोरदार,
तमाचा लगाया,
दो मिनट पहले व्हाट्स ऐप पर,
ऑनलाइन,
मुझे देख सोने का बहाना बनाया,
अंतरजाल ने सभी को,
अपना शिकार बनाया,
मिलता नहीं कोई,
ना गलियों में, ना आँगन में,
व्हाट्स ऐप का दौर जब से आया,
इसे इंसान की जीत कहु या हार,
हर रोज इस सवाल ने सताया,

16 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
    • mani 20/07/2016
  2. RAJEEV GUPTA 20/07/2016
    • mani 20/07/2016
    • mani 20/07/2016
  3. Shishir "Madhukar" 20/07/2016
    • mani 20/07/2016
  4. Dr Chhote Lal Singh 20/07/2016
    • mani 20/07/2016
  5. Meena bhardwaj 20/07/2016
    • mani 20/07/2016
  6. sarvajit singh 20/07/2016
    • mani 21/07/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 20/07/2016
    • mani 21/07/2016

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