मेरी माँ – ऋचा यादव

मेरी माँ वो है जिसने है मुझको पाला
हर मुसीबतों के पहाड़ों से उसने है मुझे निकाला.
मैं बढू कदम दो कदम वो मुझको आगे बढाए
मेरी हर तरह की गलती को वो प्यार से है बताये .
मेरे हर जख्मों के ऊपर लगता है उसका वो मलहम
चोट खाकर गिर जाने को माने है वो मेरा बचपन .
मेरी रूखी बातों में भर्ती है वो हरयाली
मेरी हर बातें लगती हैं उसको बड़ी नियाली .
मुझको जनम देकर किया है उसने मुझपर एक एहसान
कभी ना टूटे उसका विश्वास और बना रहे उसका वो मान .
माँ का कोई मोल नहीं होता वो तो अनमोल है होती
मेरी माँ सबसे प्यारी हैं मैं हूँ दावे से कहती .
जीवन में उसने मुझको है दिया जो उसने कभी ना पाया
पल – पल मेरे रहती है साथ वो बनकर मेरा साया .

8 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
  2. mani 20/07/2016
  3. babucm 20/07/2016
  4. Dr Chhote Lal Singh 20/07/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 20/07/2016
    • Richa Yadav 21/07/2016
  6. Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 21/07/2016

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