बक बक – शिशिर मधुकर

जब बहस में पहले से तय हो हमको बक बक करना हैं
दूजों की बातों तर्कों को बस हर हाल में नीचा करना हैं
उस बहस से जीवन में कूछ भी हांसिल ना होंने वाला हैं
निज हित साधन को लोगों ने ये चतुर उपाय निकाला हैं
कोई अच्छी बात करे तो इतना ज्यादा शोर मचा दो तुम
असल बात कोई समझ न पाए होकर इन हंगामों में गुम
हम चाहें या ना चाहें अपनी शक्लों को हमें दिखाओ तुम
अपना खाया हज़म करने को जम कर बीन बजाओ तुम
टीवी में घुस कर तो कोई तुमसे कुछ भी ना कह पाएगा
हाँ भोली जनता को भी पर बक बक करना आ जाएगा.

शिशिर मधुकर

24 Comments

  1. mani 20/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 20/07/2016
  2. babucm 20/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 20/07/2016
  3. Manjusha 20/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 20/07/2016
  4. Dr Swati Gupta 20/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 20/07/2016
  5. Rajeev Gupta 20/07/2016
  6. Shishir "Madhukar" 20/07/2016
  7. Shishir "Madhukar" 20/07/2016
  8. Shishir "Madhukar" 20/07/2016
  9. निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
  10. Shishir "Madhukar" 20/07/2016
  11. Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 20/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 20/07/2016
  12. Meena bhardwaj 20/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 20/07/2016
  13. sarvajit singh 20/07/2016
  14. Shishir "Madhukar" 20/07/2016
  15. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 20/07/2016
  16. Shishir "Madhukar" 21/07/2016

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