शून्य न्याय

शून्य न्याय
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कहते हैं
इस जन्म के
पापकर्मों की सजा
तय है
इसी जन्म में
अगले जन्म में
या जन्म जन्मांतरों में

मिल रही है
इस जन्म में
जो सजा हमें
वह है
न जाने किस जन्म के
और कौन से पापकर्मों की

यह कैसा विधान है ॽ

गुजरे सवर्ण पूर्वजों के
तथाकथित जुल्मों की सजा
जिंदा सवर्ण पीढ़ी को देना
न्यायोचित ठहरा दे जो
कानून वह
भारत का संविधान है ǃ
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गुमनाम कवि (हिसार)
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6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 19/07/2016
    • Gumnam Kavi 20/07/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 20/07/2016
    • Gumnam Kavi 20/07/2016
  3. babucm 20/07/2016

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