गुरु………………..

गुरु गुरु सब कहे,
जाने न गुरु का मान !
गुरु कृपा जो पाये
उसे मिले उच्च स्थान !!

एक गुरु कबीर के
ऐसा दिया उनको ज्ञान !
अनपढ़ से संत बने
लेकर एक नई पहचान !!

एक गुरु तुलसी के
फटकार से पाया ज्ञान !
प्रेम रसिक से दास बने
रामचरित मानस के विद्वान !!

एक गुरु वाल्मीकि के,
मिला ऐसा मन्त्र वरदान
त्याग गृह की माया को
किया रामायण का विन्यास !!

एक गुरु कर्ण के
जिन्होंने किया त्रिस्कार !
मन के बिठा मूरत को
पाये सर्वश्रेष्ठ शागिर्द का नाम !!

गुरु तो गुरु होते है
जाने किस रूप में मिल जाये !
जो पहचाने ह्रदय से,
दुनिया का विवेकानन्द कहलाये !!

मैं अज्ञानी निर्जन प्राणी
जन जन से सीखने की चाह धरु
इतनी शक्ति देना गुरू ईश,
हर टीका-टिप्पणी सहर्ष स्वीकार करू !!
!
!!
!!!
डी. के. निवातियाँ ___________!!!

27 Comments

    • निवातियाँ डी. के. 19/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 19/07/2016
  1. mani 19/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 19/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" 19/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 19/07/2016
  3. Meena bhardwaj 19/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 19/07/2016
      • Kiran Kapur Gulatit 20/07/2016
        • निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
  4. sarvajit singh 20/07/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
  6. sukhmangl 20/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
      • sukhmangal singh 22/01/2020
  7. babucm 20/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
  8. Dr Swati Gupta 20/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
  9. Rajeev Gupta 20/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 20/07/2016
  10. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 20/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 21/07/2016

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