गुरु जी……मनिंदर सिंह “मनी”

दिल से मैंने भगवन को आवाज़ लगाई,
झट से एक प्रतिमा मेरे सामने आई,
बोलो भक्त क्या बात ? क्यों आवाज़ लगाई ?
कर दे मेरे काम सारे, ऐसे जिन्न की इच्छा जताई,
हर वक्त काम बताना हो, वर्ना कर देगा जिन्न पिटाई,
मुस्कुराते हुए कर दी हा, भगवन ने जो शर्त बताई,
पल में सारे काम खत्म, जिन्न से पीटने की चिंता सताई,
फिर दिल से मैंने भगवन को आवाज़ लगाई,
कुछ नहीं हो सकता, ऊपर से आवाज़ आई,
जिन्न ने भी और काम की, घूर अपनी इच्छा जताई,
मैंने अपने विद्यालय के गुरु को सारी व्यथा सुनाई,
सुन सारी बात, मेरी समस्या चुटकी में सुलझाई,
पेड़ पर चढ़े, पेड़ से उतरे, खाली समय में,
ज्ञान के दीपक से, मेरे जीवन में ज्ञान की लौ जगाई,
शत-शत कर प्रणाम, गुरु जी को मेरी आँखे भर आई,
दिल से मैंने…………..

नोट-बचपन में मैंने ये कहानी सुनी थी बस उसी को कविता का रूप दिया है मैंने,
कैसे गुरु हमारे जीवन की बड़ी से बड़ी समस्या को आसानी से सुलझा देते है | हमे कभी भी उनका निरादर नहीं करना चाहिए………….

21 Comments

  1. RAJEEV GUPTA 19/07/2016
    • mani 19/07/2016
    • mani 19/07/2016
  2. Dr Chhote Lal Singh 19/07/2016
    • mani 19/07/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 19/07/2016
    • mani 19/07/2016
    • mani 19/07/2016
  4. C.m.sharma(babbu) 19/07/2016
    • mani 19/07/2016
  5. Meena bhardwaj 19/07/2016
    • mani 20/07/2016
  6. sarvajit singh 19/07/2016
    • mani 20/07/2016
  7. Dr Swati Gupta 20/07/2016
    • mani 20/07/2016
    • mani 20/07/2016
  8. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 20/07/2016

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