“सीमा”

कई बार हमें सीमाओं का ज्ञान नही होता।
अधिकार और कर्त्तव्य का भान नही होता।।
अधिकार तो चाहिए क्योंकि जन्मसिद्ध हैं।
मगर कर्त्तव्य क्यों नही? वह भी तो स्वयंसिद्ध हैं।।
दोनों एक डोर से बंधे हैं साथ ही रहेंगे।
यदि चाहिए एक तो बिखराव भी हम ही सहेंगे।।

“मीना भारद्वाज”

18 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 19/07/2016
    • Meena bhardwaj 19/07/2016
  2. RAJEEV GUPTA 19/07/2016
    • Meena bhardwaj 19/07/2016
  3. Shishir "Madhukar" 19/07/2016
    • Meena bhardwaj 19/07/2016
    • Meena bhardwaj 19/07/2016
  4. Meena bhardwaj 19/07/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 19/07/2016
    • Meena bhardwaj 19/07/2016
  6. Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 19/07/2016
    • Meena bhardwaj 19/07/2016
  7. mani 19/07/2016
    • Meena bhardwaj 19/07/2016
  8. babucm 20/07/2016
    • Meena bhardwaj 20/07/2016

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