गुर कृपा….

गुर मेरी तब लाज राखी…जब छोड़ दियो सब साथ….
ऐसे गुर को क्यूँ ना भजूं…जित भजे मिले आनंद अपार….

गुर पूरा मुझको मिला…मैल जनम जनम के गए धोए….
ऐसे गुर को क्यूँ ना भजूं…जित भजे मन निर्मल होये…..

गुर की चरणी मैं जो पड़ा…मेरा मस्तक ऊंचा गया होये….
ऐसे गुर को क्यूँ ना भजूं…जित भजे मैं अवगुण खोये ….

गुर मेरा मैं गुर का हो गया…..जब गुर ने पकड़ा हाथ….
ऐसे गुर को क्यूँ ना भजूं…..जित भजे मिले संत समाज….

गुर मेरे ने कीन्हीं किरपा…मुझे अपना लियो बनाये…..
ऐसे गुर को क्यूँ ना भजूं…..जित भजे गोबिंद मिल जाए…..
\
/सी.एम. शर्मा (बब्बू)

22 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 19/07/2016
    • babucm 20/07/2016
  2. RAJEEV GUPTA 19/07/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 19/07/2016
    • babucm 20/07/2016
  4. Meena bhardwaj 19/07/2016
    • babucm 20/07/2016
    • babucm 20/07/2016
    • babucm 20/07/2016
    • babucm 20/07/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 19/07/2016
    • babucm 20/07/2016
  6. Dr Swati Gupta 19/07/2016
    • babucm 20/07/2016
  7. mani 19/07/2016
  8. sarvajit singh 19/07/2016
    • Kiran Kapur Gulatit 20/07/2016
      • babucm 20/07/2016
    • babucm 20/07/2016

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