मोहब्बत की राहें

रखना न पाँव जमीं पर कि घुंघरू मचल जाएंगे ।
चलना संभल-संभल कर कि पाँव फिसल जाएंगे ।
राहें मोहब्बत की सदा ही रही हैं मुश्किलों भरी,
कदम बढ़ाते ही राहों पर कांटे निकल जाएंगे ।
निगाह नीची करके ही राहों से गुजरा करो तुम,
वर्ना, मनचले आशिकों के भी पर निकल जाएंगे ।
एक बार प्यार से अपनी निगाह फेर कर देखो,
आँखों में बसे होंगे जो वो दिल में उतर जाएंगे ।

विजय कुमार सिंह
vijaykumarsinghblog.wordpress.com
Note : ब्लॉग पर तस्वीर के साथ देखें.

20 Comments

  1. RAJ KUMAR GUPTA 19/07/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 19/07/2016
  3. Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 19/07/2016
  4. babucm 19/07/2016
  5. mani 19/07/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 19/07/2016
  7. RAJEEV GUPTA 19/07/2016
  8. Meena bhardwaj 19/07/2016
  9. Dr Swati Gupta 19/07/2016

Leave a Reply to babucm Cancel reply