आंचल पसार आया हूँ

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डूबा है अब ग़मों दिल किसी का आजकल।
मुश्किल हो गया है जिसका हसना आजकल।
कोई चाहता है मुझसे मेरी खुशियां उधार लेना ,
जिसके क़दमों पर में अपना कलेजा निकाल आया हूँ।
कोई चाहता है मुझको चन्द गम उधार देना ,
जिसके कदमो पे मै अपना आँचल पसार आया हूँ।

खोया है मेरे ख्वाबों में किसी का मन आजकल,
उसको होश में पाना मुश्किल हो गया है।
जागा हु जिसकी रातों में बस दो ही पल ,
थपक्कियों से भी सुलाना उसको मुश्किल हो गया है।
कोई चाहता है अब मेरे साथ जीवन बिताना ,
चूम कर जिसके माथे को जीवन संवार आया हूँ।
कोई चाहता है मुझसे मेरी खुशियां उधार लेना ,
जिसके कदमो पर मै अपना कलेजा निकाल आया हूँ।।

निकला है बाहर बंदिशों से,पहले बस कुछ दो ही पल ,
काबू में उसको लगा मुश्किल गया है।
रोया है जो गमो में किसी और के कन्धों पर ,
मेरी वाहों में उसका खिलखिलाना शामिल हो गया है।
कोई चाहता है मुझसे ही अब नज़रें मिलाना ,
जिसकी आँखों में मैं अपना संसार देख आया हूँ।
कोई चाहता है मुझसे मेरी खुशियां उधार लेना ,
जिसके कदमो पर मैं अपना …………

डरा है जो हरदम ही ,चांदनी रातों से ,
उसका अमावश्या पर मिलने आना शामिल हो गया है।
आया है जिसको गुस्सा लोगो के चुटकुलों पर ,
व्यंगों में हसकर उसका मेरी छाती थपथपाना शामिल हो गया है।
कोई चाहता है मुझको रातों में घर बुलाना ,
जिसकी चौखट पर प्यार का दीपक जला आया हूँ।
कोई चाहता है मुझसे मेरी खुशियां उधार लेना,
जिसके कदमो पर में अपना कलेजा निकाल आया हूँ।

प्रेम

7 Comments

  1. babucm 19/07/2016
  2. premkumarjsmith 19/07/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 19/07/2016
  4. Astha gangwar 20/07/2016
    • premkumarjsmith 19/08/2016
  5. premkumarjsmith 20/07/2016

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