आज़ादी के 69 सालों बाद भी 1.83 करोड़ हिन्दुस्तानी गुलामी की ज़ंजीरों में जकड़े हुए हैं

विश्व का सबसे लोकतांत्रिक
देश का नाम हिन्दुस्तान है. यह
हमारा देश भी है, जिसे हम
प्यार से ‘भारत मां’ कहते हैं.
लेकिन दुख की बात ये है कि
‘भारत मां’ की कई संतानें अभी
भी गुलामी की ज़ंजीरों में
जकड़ी हुई है. यहां रह रहे सभी
नागरिकों को 6 मूल अधिकार
दिए गए हैं, जिसका मर्म यह है
कि वो अपनी इच्छा से कहीं
भी रह सकते हैं, कुछ भी बोल
सकते हैं और कोई भी धर्म अपना
सकते हैं. लेकिन वास्तविकता यह
है कि देश में रह रहे कई लोगों को
इन अधिकारों के बारे में
जानकारी नही हैं.
ग्लोबल स्लेवरी इंडेक्स की एक
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर
में आधुनिक युग के गुलामों की
तरह जीने वालों की तादाद
करोड़ों में है, जिनमें एक-तिहाई
से ज्यादा आधुनिक गुलाम तो
केवल भारत में ही हैं. इस सर्वे में
कई और महत्वपूर्ण जानकारियां
हैं, जिनके बारे में जानकर आप और
हैरान हो जाएंगे.
गुलाम कौन होते हैं?
आदिम काल की बात करें तो
गुलाम का अर्थ दासता से है,
जिसका अर्थ गुलाम को एक
कैदी की तरह रखा जाना है.
लेकिन वर्तमान समय में इसे
बेगारी कहते हैं, जिसका मतलब
बिना मेहनताना देकर काम
करवाने से है. भारत में सेक्सवर्कर,
सेना, मजदूर, घरेलू नौकर, बंधुआ
मजदूर, भिखारी और किसान
इसी श्रेणी में आते हैं.
इस तरह की दासता झेल
रहे सबसे ज्यादा लोग
भारत में रहते हैं. इनकी
संख्या 1.83 करोड़ आंकी
गई है.
ग्लोबल स्लेवरी इंडेक्स में
कुल 167 देशों की सूची
बनाई गई है. जहां भारत
की कुल आबादी का 1.4
फीसदी गुलामी में
फंसा है.
वॉक फ्री फाउंडेशन के अध्यक्ष
एंड्रयू फॉरेस्ट ने दुनिया की
बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और सभी
सरकारों से इन गुलामों की मदद
करने का आह्वान किया है.
ये देश का दुर्भाग्य ही है
कि देश आज़ाद होने के
बावजूद अभी भी इतने
गुलाम मौजूद हैं. इसे
सरकार की नाकामी
ही कहा जा सकता है.
वर्तमान में हम इतने सक्षम
हैं कि इन लोगों का
ध्यान रख सकें. ख़ैर,
सरकार से ऐसे लोगों का
ध्यान रखने के लिए
अपेक्षा ही की जा
सकती है.

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 19/07/2016

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