जन्मों के नाते – शिशिर मधुकर

मन कर्म और वचन से जो भी साथ निभाते हैं
बिना जतन वहीँ लोग जन्मों के नाते बनाते हैं
गर आज तुमको मुझसे यहाँ कोई भी गिला हैं
जो दिया तुमने मुझको वहीँ लौट कर मिला हैं

तर्क और वितर्क से कभी आनँद ना मिलता हैं
सूरज की रोशनी से ही तो चाँद भी खिलता हैं
गर पूरा हो समर्पण तो मालिक की रहमतों से
कीचड़ में भी तुम देखो कैसे कमल खिलता हैं.

शिशिर मधुकर

21 Comments

  1. Kiran Kapur Gulati 17/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 17/07/2016
  2. C.m.sharma(babbu) 17/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 17/07/2016
  3. Shishir "Madhukar" 17/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 17/07/2016
  4. mani 17/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 17/07/2016
  5. Swati naithani 17/07/2016
  6. Shishir "Madhukar" 17/07/2016
  7. sarvajit singh 17/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 18/07/2016
  8. RAJEEV GUPTA 18/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 18/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 19/07/2016
  9. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 18/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 19/07/2016
  10. शैलेन्द्र बी एच यू 19/07/2016

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