गाफिल…………मनिंदर सिंह “मनी”

असर कुछ ऐसा हुआ तेरे इश्क का,
गाफिल हुए फिरते है, त्रिभुवन की बातों से,
हम हम ही ना रहे, हम तुम हो गए,
निकाल कर ले गए दिल, निगाहो से,
पलो में सिमटी थी मुलकात हमारी,
लूट लिया तूने दिलकश अदाओं से,
कर मोहनी मन्त्र, कहाँ तिरोहित हो गए ?,
मजनू बन, ठिकाना पूछता “मनी” तेरा हवाओं से,

गाफिल-बेखबर
त्रिभुवन-जहान
तिरोहित-गायब

16 Comments

  1. C.m.sharma(babbu) 16/07/2016
    • mani 17/07/2016
    • mani 17/07/2016
  2. kiran kapur gulati 16/07/2016
    • mani 17/07/2016
  3. sarvajit singh 16/07/2016
    • mani 17/07/2016
  4. Shishir "Madhukar" 17/07/2016
    • mani 17/07/2016
    • mani 17/07/2016
  5. RAJEEV GUPTA 18/07/2016
  6. mani 18/07/2016
  7. Dr C L Singh 18/07/2016
    • mani 19/07/2016

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