छुपी हुई घृणा – शिशिर मधुकर

तेरी सच्चाई का कल हमको पता चल ही गया
तेरे दिल का हाल तेरी जुबां से निकल ही गया
मेरी छवि ही जब आज तक ना तुझे मंजूर हुई
प्रेम श्रद्धा आदर की उम्मीदें तो कोसों दूर हुई

पूरे मन से जब किसी का इकरार नहीं होता हैं
लाख कोशिश करो फ़िर भी प्यार नहीँ होता हैं
ऐसे रिश्तों को मजबूरी में लोग निभाते हैं यहाँ
छुपी हुई घृणा का कोई तलबगार नहीँ होता हैं

शिशिर मधुकर

23 Comments

    • Shishir "Madhukar" 16/07/2016
  1. Meena bhardwaj 16/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 16/07/2016
  2. mani 16/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 16/07/2016
  3. kiran kapur gulati 16/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 16/07/2016
  4. sarvajit singh 16/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 16/07/2016
  5. babucm 16/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 16/07/2016
  6. Shishir "Madhukar" 16/07/2016
  7. Shishir "Madhukar" 16/07/2016
  8. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/07/2016
  9. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/07/2016
  10. Shishir "Madhukar" 16/07/2016
  11. RAJEEV GUPTA 16/07/2016
  12. Shishir "Madhukar" 16/07/2016
  13. Swati naithani 17/07/2016
  14. Shishir "Madhukar" 17/07/2016

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