वजह…………मनिंदर सिंह “मनी”

तस्सली देने वाले, दगा कर गए,
उठ ना सकु, ऐसी मार कर गए,
लगाते-लगाते मरहम जख्मो पर,
जख्म गहरा और गहरा कर गए,
ले तमाम खुशिया, मेरी जिंदगी से,
दर्दीला दामन हवाले कर गए,
हर उम्मीद पर खरा उतरा मैँ,
उम्मीदों को जला, अँधेरा कर गए,
क्या खता थी मेरी, समझ नहीं पाया मैँ,
अच्छा है बेवजह जीने से “मनी” वजह कर गए |

16 Comments

  1. babucm 15/07/2016
    • mani 15/07/2016
  2. babucm 15/07/2016
    • mani 15/07/2016
    • mani 15/07/2016
  3. Shishir "Madhukar" 15/07/2016
    • mani 16/07/2016
  4. सोनित 15/07/2016
    • mani 16/07/2016
  5. sarvajit singh 15/07/2016
    • mani 16/07/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/07/2016
    • mani 16/07/2016
  7. Meena bhardwaj 16/07/2016
    • mani 16/07/2016

Leave a Reply