बचपन सुहाना

बचपन की बातें
वो तारों भरी रातें
गर्मी के मौसम में
बदली का छाना
और
अचानक ही बहना
ठंडी हवा. का
बिस्तर पे लेटे
नज़ारा करते थे हम
छुपता था चंदा
कभी बदली के डर से
कभी बदली की
बाँहों में घिरना घिरना
मज़ा देता था कितना
वो छुपना छुपाना
कभी उनका मिलाना
कभी दूर. जाना
कितनी प्यारी थी रातें
और
समां भी सुहाना
है याद अब भी
वो बचपन का आलम
हर बात पर
जब दिल झूमता था
न जाने. सितारों.
में क्या ढूंढता था
छोटी छोटी बातों पे
मचल जाता था वो
चाहने पे लाख
न काबू. में आता था वोः
था चंचल बहुत वोः
बचपन सुहाना
याद आती हैं अक्सर
वो तारों भरी रातें
प्यारी प्यारी सी
वो बचपन की बातें

12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 14/07/2016
    • kiran kapur gulati 14/07/2016
    • kiran kapur gulati 14/07/2016
  2. mani 14/07/2016
    • kiran kapur gulati 14/07/2016
  3. babucm 14/07/2016
    • kiran kapur gulati 14/07/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/07/2016
    • kiran kapur gulati 14/07/2016
  5. sarvajit singh 14/07/2016
    • kiran kapur gulati 15/07/2016

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