सावन

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अब के सावन जम के बरसें
खुशीयों को अब हम ना तरसें

तालाब पानी से भर भर जायें
सारा आलम नाचे गुनगुनायेंं

सावन ने हर ली सब की पीड़ा
बाग बगिचें में होती हैं क्रीड़ा

सूखे खतों में आयी हरियाली
गावों की ये बड़ी खुशहाली
@:-अभिषेक शर्मा
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11 Comments

  1. mani 13/07/2016
  2. C.m.sharma(babbu) 13/07/2016
  3. sarvajit singh 14/07/2016
  4. Shishir "Madhukar" 14/07/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/07/2016

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