सिपाहीं

कलम का सिपाही हूं।
कलम ही चलाता हूं।
जोड़-जोड़ शब्दों को।
कविता ही बनाता हूं।
मन को तसल्ली मिलती है।
जब कविता सुनाता हूं।
नुक्स निकालने के लिए।
कवियों को उकसाता हूं।
नहीं ऐसी आदत है न।
कविता को चुराता हूं।
मन में ख्याल आते ही।
कलम को चलाता हूं।
कलम का सिपाही हूं।
कलम ही चलाता हूं।
जोड़-जोड़ शब्दो को।
कविता ही बनाता हूं।

5 Comments

  1. C.m.sharma(babbu) 13/07/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 13/07/2016
  3. mani 13/07/2016
  4. वेद प्रकाश राय 13/07/2016

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