बिहार यात्रा…………मनिंदर सिंह “मनी”

ना भूले वाली मेरे जीवन की बिहार यात्रा……………..

मैँ चल दिया बिहार यात्रा करने,
अपने मित्र के साथ,
बैठे दोनों रेलगाड़ी में, लुधिआना से गया का टिकट ले,
मालूम ही ना पड़ा, चौबीस घंटे कब गुजरे करते बात,
पहुंचे गया स्टेशन, जैसे ही उतरे डिब्बे से,
घेर लिया चारो तरफ से, बाबू जी कहाँ जायेंगे ?
हम छोड़े देते है, तभी मित्र मेरे मुझ से बोले-
जेब सम्भाल के, भाग ना जाये कोई काट,
हम दोनों कुछ आगे बढ़े, देखी बस जैसे ही चढ़ने लगा,
भीड़ से लबा-लब, इतने में कंडक्टर आया,
बोला छत पर बैठोगे किराया सत्ताइस रुपया, सीट पर चालीस,
भीड़ से डरते बैठ गए ऊपर, ठंडी-ठंडी हवाएं,
दूर दूर तक दिख रहा था नज़ारा,
दिल से आवाज़ आ रही थी, वाह क्या बात ?
कुछ आगे पहुंचे देखा, पुलिस चौंकी में जांघिया,
दीवारों पर टंगे थे, कुछ पुलिस वाले मस्त हो तोड़ रहे थे खाट,
फिर पहुंचे अपने मित्र के गांव में,
कुछ शर्म सी थी उसके चेहरे पर, शायद गरीबी को लेकर,
कसकर गले से लग गए मेरे मित्र के,
उसके अपने जो देख रहे थे, पिछले साल से उसकी बाट,
बहुत मार्मिक थे वो कुछ पल, आँखों में अश्रु पर खुशी से,
लग गया बच्चों का ताता, देखने आ गए सभी सरदार जाट,
पुरातन की गवाही दे रहे हर किसी के घर, सादा पहरावा,
केले की सब्जी और पूड़ियाँ, शीतल जल का,
बैठ जमी पर लिया आनंद, फिर घुमा गांव,
कही केले के पेड़, कही बास के ढेर,
थकावट में जाने मजे से कब गुजरी रात,
फिर सुबह चल दिया पटना साहिब की तरफ,
माथा तक गुरु घर, लंगर की सेवा में बाटा हाथ,
फिर गोल घर, चिड़िया घर का आनंद ले.
लिया कुछ सामान, किया रुख गांव की तरफ,
पांच दिन मैँ रूका वहाँ, छोड़ गए मेरे दिल पर अमित छाप,
मैँ फिर आऊंगा, तुमसे मिलने,
तुमसे मिलकर हुई खुशी, कह कर आया था मैँ सबसे ये बात,

16 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/07/2016
    • mani 12/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/07/2016
    • mani 12/07/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/07/2016
  3. Manjusha 12/07/2016
    • mani 13/07/2016
  4. ANAND KUMAR 12/07/2016
    • mani 13/07/2016
  5. Shishir "Madhukar" 12/07/2016
    • mani 13/07/2016
  6. C.m.sharma(babbu) 12/07/2016
    • mani 13/07/2016
  7. sarvajit singh 12/07/2016
    • mani 13/07/2016

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