गमों की दश्तें – शिशिर मधुकर

दिल के सबसे करीब रिश्ते जब झूठे निकलें
इंसान टूट कर बस यहाँ ठगा सा रह जाता है
कितनी भी कोशिशें करो फ़िर खुश रहने की
बैचैन दिल को फ़िर कभी चैन कहाँ आता हैं.

जिनमे दर्द ना हो वो रिश्ते भी कोई रिश्ते हैं
फ़िर भी निभाए इन्हे यहाँ जो सब फरिश्ते हैं
अगर ध्यान से देखोगे हँसते चेहरों की तरफ़
मुस्कराहट के पीछे भी छुपी गमों की दश्ते हैं

शिशिर मधुकर

14 Comments

  1. C.m.sharma(babbu) 12/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 12/07/2016
  2. sarvajit singh 12/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 12/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 12/07/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 12/07/2016
  4. Shishir "Madhukar" 12/07/2016
  5. mani 12/07/2016
  6. Shishir "Madhukar" 12/07/2016
  7. Meena bhardwaj 12/07/2016
  8. Shishir "Madhukar" 12/07/2016

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