गैर – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

गैर

अपने लोग ही गम देते हैं
दूसरे तो हाथ थाम लेते हैं ………………….
किसको अपना समझें किसको गैर
किससे दोस्ती रखें किससे बैर ……………………
ये तो पता तब चला जब बुरा वक़्त आया
अपनों ने हाथ झटक दिया गैरों ने गले लगाया

शायर : सर्वजीत सिंह
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12 Comments

  1. सोनित 12/07/2016
    • sarvajit singh 12/07/2016
  2. mani 12/07/2016
    • sarvajit singh 12/07/2016
  3. Shishir "Madhukar" 12/07/2016
  4. ANAND KUMAR 12/07/2016
  5. sarvajit singh 12/07/2016
  6. C.m.sharma(babbu) 12/07/2016
    • sarvajit singh 12/07/2016
    • sarvajit singh 13/07/2016

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