बच्चे की चाहत

मम्मी पापा की चाहत मै
इन्जिनियर डाक्टर बन जाऊ
पर कोई मुझसे ना पुछे,
मै क्या बनना चाहूँ

फूलों पर तितलियाँ
इतरायें इठलायें
पास आती देख मुझे
पल भर में उड़ जायें
उनको देख मै भी सोचूँ
काश तितली बन जाऊ
पर कोई मुझसे ना पुछे,
मै क्या बनना चाहूँ

आँगन मे ची-ची करती
गौरेया बच्चों संग आये
फुदुक फुदुककर चुगे दाना
सबका मन बहलाये
देख गोरैया मन हो मेरा
मै नील गगन मे उड़ जाऊ
पर कोई मुझसे ना पुछे,
मै क्या बनना चाहूँ।

मम्मी पापा के सपने में
मेरे सपने टूट गयें
जो चाहा मैने कुछ करना
मेरे अपने ही रूठ गये
व्याकुल मन बस यही कहे
मै सारे बन्धन तोड़ जाऊ
पर कोई मुझसे ना पुछे,
मै क्या बनना चाहूँ
!!!!
!!!!
सुरेन्द्र नाथ सिंह “कुशक्षत्रप”

17 Comments

  1. babucm 11/07/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 11/07/2016
  3. Shishir "Madhukar" 11/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 11/07/2016
  4. chandramohan kisku 11/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 11/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 11/07/2016
  5. mani 11/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 11/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 11/07/2016
  6. sarvajit singh 11/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/07/2016
  7. Rinki Raut 11/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/07/2016
  8. Dr Chhote Lal Singh 25/07/2016

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