इश्क़ इबादत करनी है तो …

इश्क़ ईबादत करनी है तो
दिल के चौबारे पे निकल
दो क़दम मैं जो बढूँ तो
एक क़दम तू भी तो चल….

गिरना है तो दोनों मिल कर
गिर जाएँ कुछ इस क़दर
मैं न बदलूँ तू ना बदले
बदले ज़माना तो जाये बदल…
इश्क़ इबादत करनी हो तो….

यूँ ही नहीं आती है लबों पे
कभी किसी की मुस्कराहट
सौ गम दबते है दिल में तब
हंसी दिखती है होठों पे निकल…
इश्क़ ईबादत करनी है तो…

एक मतलब से पास आये
एक मतलब से छोड़ गए वो_
है ये ज़माना बड़ा सयाना
एक हरेन ही है कम अकल…

इश्क़ ईबादत करनी है तो
दिल के चौबारे पे निकल…
दो क़दम मैं जो बढूँ तो
एक क़दम तू भी तो चल…

-हरेन्द्र पंडित

5 Comments

  1. C.m.sharma(babbu) 10/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" 10/07/2016
    • Harendrra Pandit 18/07/2016
  3. mani 10/07/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 10/07/2016

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