दर्द के समुंदर – शिशिर मधुकर

मेरे महबूब इस जनम में तू दीवाना हम जैसा ना पाएगा
हमारी याद बहुत आएगी जब तू औरों को आज़माएगा.

दुनियाँ के डर से भले ही तूने खुद को अकेला कर लिया
हमको यकीं है पूरा एक दिन तू फिर हँसेगा मुस्कराएगा

दुनियाँ के अपने कायदे हैं मुहब्बत का भी है अपना धरम
हर शख्स जिन्दगी के इस खेल में अपना चरित्र निभाएगा

नदियाँ की बहती धारा को तुम कितना भी चाहे रोक लो
एक न एक दिन पानी तो गहरे समुन्दर तक पहुँच जाएगा

वो क्या जानें हमको नशा है दर्द के समुन्दर को पीने का
मुहब्बत का मज़ा तो ऐ मेरे यारों इस हाल में ही आएगा

शिशिर “मधुकर”

16 Comments

    • Shishir "Madhukar" 09/07/2016
  1. RAJEEV GUPTA 09/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 09/07/2016
  2. C.m.sharma(babbu) 09/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 09/07/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 09/07/2016
  4. Shishir "Madhukar" 09/07/2016
  5. mani 09/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 09/07/2016
  6. Shishir "Madhukar" 09/07/2016
  7. sarvajit singh 09/07/2016
  8. Shishir "Madhukar" 09/07/2016
  9. Meena bhardwaj 10/07/2016
  10. Shishir "Madhukar" 10/07/2016

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