आकर दीप जला जाना

रात घिरी कारी कजरारी
आ कर दीप जला. जाना
अंधकार में घिरी मुरारी
बंसी मधुर बजा जाना
मन वीणा सो सी गयी
झंकार इक सुना जाना
मिलन की इक प्यास जगी है
आकर उसे बुझा. जाना
सुर गीतों के खो से गए हैं
चाँद सितारे सो से गए हैं
आकर अलख जगा जाना
बुझते दीप जला जाना
कारे तुम कजरारी. रात
जो मैं. तुमको. ढून्ढ न. पाऊं
मेरे सपनो में तुम. आ जाना
आकर. गले लगा जाना
बुझते दीप जला जाना
मौन. गुमसुम. सी. रातों. में
वीणा के तार. सजा जाना
कोई मधुर गीत सुना जाना
हो बरसात यां चांदनी रात
चुपके से तुम आ. जाना
भीगे भीगे मौसम में
रस बूँदों का टपका जाना
लिए. नैना. कारे कजरारे
सपनो में तुम आ. जाना
मधुर मुस्कान लिए अधरों पे
मीठे राग. सुना जाना
फंसे हैं विषय वासनाओं में हम
आके मुक्त करा जाना
धुन बंसी की सुना कर तुम
अमृत पान करा जाना
बीत न जाये. यह जीवन योँ ही
सीधी राह दिखा जाना
घिरी रात कारी कजरारी
आ कर दीप जला जाना

12 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 07/07/2016
    • kiran kapur gulati 08/07/2016
  2. C.m.sharma(babbu) 07/07/2016
    • kiran kapur gulati 08/07/2016
  3. Basudeo Agarwal 08/07/2016
    • kiran kapur gulati 08/07/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 08/07/2016
    • kiran kapur gulati 08/07/2016
  5. Shishir "Madhukar" 08/07/2016
    • kiran kapur gulati 08/07/2016
  6. kiran kapur gulati 08/07/2016

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