वाह! रे ज़िन्दगी!

ए ज़िन्दगी!
जब तक तूने बहाया अपने बहाव में
मैं यूँ ही बिन कुछ कहे बहता रहा…!!!
जब तक तूने मुझे अपने शरारतों से सताया
मैं यूँ ही बिन सोचे सहता रहा…!!!
जब तक तूने अपने इशारों पर नचाया
मैं यूँ ही बिन समझे नाचता रहा …!!!
जब तक तूने मुझे अपने परेशानी के आग में झुलसाया
मैं यूँ ही सब सहकर झुलसता रहा …!!!
जब तक तूने मुझे अपने काम के लिए मीठी बातो में बहलाया
मैं किसी की बिना कुछ सुने यूँ ही बहलता रहा..!!
पर जब आज मेरी बारी आई तुझसे कुछ कहने की …
तुझसे कुछ मांगने की …तुझसे हक़ जताने की ….
तुझसे अपने दिल की बात बताने की …
तूने मुझसे ऐसे मुंह मोड़ लिया पल भर में
जैसे हम दोनों बरसों से अंजान है ….!!!!
अपने चेहरे की खूबसूरती के लिए
इक छोटी मुस्कान क्या मांगी
तूने तो अपनी असली औकात दिखा दी ….!!!
वाह! रे ज़िन्दगी!
गलती से ही सही पर तूने मेरे आँखों से
दूसरों से उम्मीद रखने की पट्टी हटा दी..!!!

16 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 06/07/2016
    • Ankita Anshu 06/07/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 06/07/2016
    • Ankita Anshu 07/07/2016
  3. vinay kumar 06/07/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 06/07/2016
    • Ankita Anshu 07/07/2016
  5. sarvajit singh 06/07/2016
    • Ankita Anshu 07/07/2016
  6. C.m.sharma(babbu) 06/07/2016
    • Ankita Anshu 07/07/2016
    • Ankita Anshu 07/07/2016
    • Ankita Anshu 07/07/2016
  7. mani 07/07/2016
    • Ankita Anshu 07/07/2016

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