रिक्शे वाले की जान

रिक्शे वाले की जान
बहुत सस्ती है

पैरो की नसें मोटी हैं
कद बहुत छोटी है
हालत पतली औऱ खस्ती है

रिक्शे वाले की जान …

चंद रूपए पर बसर हो रहा
जिगर से कितनों का भार ढो रहा
लोग सीने पर उसके चढ़कर
करते मस्ती है
रिक्शे वाले की जान …..

जूते पैरों के सारे दर्द बया करते हैं
फटी पगडी में दिन रात जीते मरते हैं

माली हालत में बच्चे
घर औऱ गीरस्ती है
रिक्शे वाले की जान ……

नमक भीनी रोटी में दिन निकलता है
घिसी पाइडिल फटे टायर में
वो फिसलता है
गाड़ी जीवन की बस
चलती जबरदस्ती है
रिक्शे वाले की जान …..

उम्र घिसता गय़ा
सीट के कवर की तरह
रीढ़ की हड्डी झुकी
ट्यूब की सिकुड़न की तरह
अमन में चैन में आँखे क्या
उसकी हँसती हैं

रिक्शे वाले की जान बहुत सस्ती है
!
!
??डॉ सी एल सिंह ??

11 Comments

  1. chandramohan kisku 06/07/2016
  2. mani 06/07/2016
    • Dr Chhote Lal Singh 06/07/2016
      • mani 06/07/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 06/07/2016
  4. Shishir "Madhukar" 06/07/2016
  5. Dr Chhote Lal Singh 06/07/2016
  6. C.m.sharma(babbu) 06/07/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 06/07/2016

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