रथ पर आये श्री भगवान

उष्ण-आद्र का सुखद मिलन है
शांत हुई बूंदों से तपन है
आकाश में बादल छाये हैं
धरती की प्यास बुझाये हैं
समस्त सृष्टि के पालनकर्ता
अर्जुन के प्राण से प्यारे सखा
भक्ति का लेकर पैगाम
रथ पर आये श्री भगवान.
दुष्ट और दुर्जन का बल था
जहाँ नजर जाती थी छल था
विविध क्लेश को सहता मन था
अधर्म के संग में बेबस जन था
समस्त सृष्टि के पालनकर्ता
अर्जुन के प्राण से प्यारे सखा
भक्ति का लेकर पैगाम
रथ पर आये श्री भगवान.
अधर्म का अंत करने के हेतु
धर्म की आस्था जगाने हेतु
सारथि बनकर रथ हांका था
भूमि का क्षोभ संताप देखा था
समस्त सृष्टि पालन कर्ता
अर्जुन के प्राण से प्यारे सखा
भक्ति का लेकर पैगाम
रथ पर आये श्री भगवान.
अधरों पर उनकी स्मित निश्छल
थे बलिदानी त्याग के संबल
दीन जनों के बने सहारे
कठिन क्षणों में उन्हें उबारे
समस्त सृष्टि के पालन कर्ता
अर्जुन के प्राण से प्यारे सखा
भक्ति का लेकर पैगाम
रथ पर आये श्री भगवान.

9 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 06/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" 06/07/2016
    • Bharti das 06/07/2016
  3. bharti das 06/07/2016
    • Bharti das 06/07/2016
  4. Shishir "Madhukar" 06/07/2016
  5. C.m.sharma(babbu) 06/07/2016
    • Bharti das 08/07/2016

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