बेहिसाब…….मनिंदर सिंह “मनी”

बेहिसाब दर्द था, तेरे दिए जख्मो में,
फिर भी ख़ुशी ढूंढ ली, तेरे किये सितमो में,
बहाने मुझे भी आते है बेहिसाब बनाने,
मुस्कराहट लिए चेहरे पर, आऊंगा तुझे जलाने,
गरूर ना कर अपनी मदमस्त खूबसूरत जवानी का,
जरा सोच शिकवा किससे करेगी ढलती जवानी का,
वक्त है अब भी सम्भल जा, क्या पता जिंदगी की रवानी का ?
सोचना मत फिर कहाँ चला गया :मनी” हिस्सा था मेरी कहानी का ?,

12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 05/07/2016
    • mani 06/07/2016
  2. आदित्‍य 05/07/2016
    • mani 06/07/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 05/07/2016
    • mani 06/07/2016
  4. sarvajit singh 05/07/2016
    • mani 06/07/2016
  5. babucm 06/07/2016
    • mani 06/07/2016
    • mani 06/07/2016

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