मेरा सनम – शिशिर मधुकर

तुझको छू कर है कसम तू हैं बस मेरा सनम
तेरा जो साथ मिला कुछ ना चाहेंगे अब हम

तू अगर साथ में हैं खुशियाँ बरसात में हैं
महकी महकी सी फिजा चाँदनी रात में हैं
तेरी खुशबू का नशा मुझको मदहोश करे
नैना खुलते ही नहीँ बहके बहके हैं क़दम

तुझको छू कर हैं कसम तू हैं बस मेरा सनम
तेरा जो साथ मिला कुछ ना चाहेंगे अब हम

तेरे ये बोल जब भी मुझे सुनने को मिलें
मेरे सीने में जैसे लाखो गुल संग में खिले
मायूसी दूर हुई और खामोशियों चूर हुई
सारी दिशाओं में निखरा निखरा हैं चमन

तुझको छू कर हैं कसम तू हैं बस मेरा सनम
तेरा जो साथ मिला अब कुछ ना चाहेंगे हम

शिशिर मधुकर

17 Comments

  1. babucm 05/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 05/07/2016
  2. Dr Chhote Lal Singh 05/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 05/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 05/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 05/07/2016
  3. mani 05/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 05/07/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 05/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 05/07/2016
  5. sarvajit singh 05/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 05/07/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 06/07/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 06/07/2016
  8. Shishir "Madhukar" 06/07/2016

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