निर्भया

सुनकर होता है दुख
प्रतिदिन ये की
नही रही सुरक्षित
अब मे कही भी
क्यो हो गये जालिमो के
भाव इतने हीन?
ली है करवट समय ने ऐसी
कि अपराधी की उम्र
तय करेगा उसका कपट।
जब हुआ था चीरहरण
द्रोपदी का
की थी रक्षा उसकी
स्वयं भगवान ने ,
लेकिन
वर्तमान मे है होता जब ऐसा
तो
रहती है छपी समाचार पत्रों मे
उसकी ‘लूटी हुई इज़्ज़त’ की खबर।
दी जाये ऐसे लोगों को कड़ी सजा
ताकि मिल सके इस दुनिया को सबक़
ना दोहराये जाये फिर से
ये शब्दावली और
ना दुबारा मिले “निर्भया” को
केन्डल मार्च से श्रद्धाजली।

7 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 04/07/2016
    • Anmol 05/07/2016
  2. Dr Chhote Lal Singh 05/07/2016
  3. Dr Chhote Lal Singh 05/07/2016
  4. babucm 05/07/2016
  5. mani 05/07/2016

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