प्रेम

प्रेम का पाठ सारी दुनिया पढ़ाये
खुद ना इसका सार समझ पाये
बन ज्ञानी सब देते सीख दूजे को
खुद बैठे ह्रदय में नफरत छिपाये !!
!
प्रेम कोई प्रसाद नहीं, बिन तप मिल जाये
इसको पाने के लिए जीवन कम पड़ जाये
ये तो साधना मीरा, रहीम और सूरदास की
सच्चे ह्रदय से जप करे विष अमृत बन जाये !!

14 Comments

  1. babucm 05/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 05/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 05/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 05/07/2016
  2. mani 05/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 05/07/2016
  3. sarvajit singh 05/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 05/07/2016
  4. Shishir "Madhukar" 05/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 06/07/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 06/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 06/07/2016

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