माँ के आगे हर सवाल छोटे

छोटी सी ऐ जिंदगी सवाल क्‍यों बड़े बड़े
कब निकल गया बचपन कब जवानी में पड़े

हंसते हंसते निकल गये घर से जिमेदारीयों के तले
मिला नहीं वो चाहा ,दिये इम्तिहान बड़े बड़े

आज भी घर की दहलीज़ में कुछ तो भूल पड़े
हंसती हुई माँ के कुछ अश्क हम कैसे भूल पड़े

माँ की हर दुवां में कितने जवाब थे पड़े
हर इम्तिहान में अपनी माँ को देख पड़े

अपने से पहले हर खुशी माँ को दे पड़े
जिंदगी की हर मुश्किलों से हम जीत पड़े
:[email protected]अभिषेक शर्मा

20 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 03/07/2016
  2. Rinki Raut 03/07/2016
  3. mani 03/07/2016
  4. अकिंत कुमार तिवारी 03/07/2016
  5. sarvajit singh 03/07/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/07/2016
  7. Dr Swati Gupta 03/07/2016
  8. C.m.sharma(babbu) 03/07/2016
  9. Shishir "Madhukar" 04/07/2016
  10. आदित्‍य 04/07/2016

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