त्रासदी

नदियाॅ इंतजार में रहंेगी ता उमरए अपने ही राहों के तलाश में
तमाम दरिया समन्दर में डूब जायेंगीए एक दिन के इतिहास में।

जमानें की बात न करो अब तो अच्छा हैए अपने इस जुबान से
कयामत के दिन अब दूर नहींए खिलेगा नहीं फूल कोई पलास में।

सोये मुर्दे जो भी थे वर्षो तलक कब्र मेंए अब कोहराम वो मचायंेगे
आत्मा जो भटक गये थे उनके इस तरहए इधर से उधर प्यास में।

हिमालय भी चोटें खायीं बहुतए दुसित वतन यह संसार का
संस्कृति बदल रही सभ्यता बदल गईए अब यह विनास में।

एहसास हो रहा यह संकट आ रहाए अजब गजब से ये जलजला
धर्म और अधर्म पाप के बीज जूझती हुईए यह अब अंधविश्वास में।

प्यार बन गया धोखाए विश्वास बन गया इक छलावा इस तरह
हवाला.घोटाला लूट बजारीए घूसखोरी भी करते है विश्वास में।

कही फरेबी कहीं है धोखाएकहीं तो दुशासन के कुशासन जैसा
घूम रहे नसेडी बारों मेंए खून तक कर देते और घूमते बिंदास में।

इयालत के अहलकारों का क्याए जो जी रहे तगाफूल के साथ
सरिश्त इक तिज़ारत बन रह गईए इस तरह जीवन उल्लास में।

बी पी शर्मा बिन्दु

Writer Bindeshwar Prasad Sharma (Bindu)
D/O Birth 10.10.1963
Shivpuri jamuni chack Barh RS Patna (Bihar)
Pin Code 803214

8 Comments

  1. babucm 02/07/2016
    • Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 02/07/2016
  2. Amar Chandratrai 02/07/2016
    • Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 02/07/2016
  3. mani 02/07/2016
    • Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 02/07/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 02/07/2016
    • Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 02/07/2016

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