“”फ़रेबी निगाहें””

निगाहें भी अकसर फ़रेबी बन जाया करतीं हैं ……
हकीकत कुछ और होता है बयां कुछ और करतीं हैं…
छुपातीं हैं अपने अश्कों को और लबों पर दिखावटी मुस्कुराहट बरक़रार रखतीं हैं ……
और पलकों पर सपनों के बोझ को यूंही सजाया करतीं हैं ….
निगाहें भी अकसर फ़रेबी बन जाया करतीं हैं
हकीकत कुछ और होता है बयां कुछ और करतीं हैं…

12 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 01/07/2016
    • Ankita Anshu 01/07/2016
  2. SAURABH PANDEY 01/07/2016
    • Ankita Anshu 01/07/2016
  3. Shishir "Madhukar" 01/07/2016
    • Ankita Anshu 01/07/2016
  4. C.m.sharma(babbu) 01/07/2016
    • Ankita Anshu 01/07/2016
  5. C.m.sharma(babbu) 01/07/2016
  6. sarvajit singh 01/07/2016
  7. Amar Chandratrai 02/07/2016

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