जिंदगी गुनहगार हो गयी………..

इश्क़ की राहों में दिल अब कहीं भटक गया
चार दिन की आंशिकी को दिल-लगी समझ गया

देख के इश्क़ में जिंदगी की बे-चारगी
लगी मोहब्बत की आग भी अब बुझ गयी

इश्क़ की वो अब, कांतिल सी बन गयी
जिंदगी एक कांतिल की शिकार हो गयी

दरमियाँ कुछ ना रहा ,अब याद आना भी छुट गयी़
सौ गुनाह माफ़ करते करते ऐ जिंदगी गुनहगार हो गयी
:[email protected]अभिषेक शर्मा

18 Comments

  1. mani 01/07/2016
  2. आदित्‍य 01/07/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 01/07/2016
  4. Shishir "Madhukar" 01/07/2016
  5. sarvajit singh 01/07/2016
  6. अकिंत कुमार तिवारी 01/07/2016
  7. babucm 02/07/2016
  8. Amar chandratrai Pandey 02/07/2016
  9. Dr Swati Gupta 02/07/2016

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