लफ़्ज़ों के दरमियाँ

1) तू हासिल न होगा कभी
इसका यकीन हो चला है अब मुझे
धड़कनो में हो गया है शामिल
इस बात का कोई गुमा न रहा

2) खुद को मसरूफ कर लिया हमने
के तेरी याद न आए
कमबख्त नींदें दगाबाज़ निकलीं
ख्वाबों में ले आयीं तेरे साए

3) उनकी तस्वीर कहर बरसाने लगी है
चुप रहती है मगर
चाहत निभाने लगी है

4) अंदाज़ तेरा इस कदर भा गया हमें
जन्नत कम पड़ गई इस दिल को रिझाने के लिए |

5) आंखों से सब बयां कर दिया तूने
काश लफ़्ज़ों को भी मौका दिया होता |

6) खुद से दूर हमें भेज तो दिया तुमने
तुम्हारे अश्कों की नमी बनकर हम रहेंगे सदा

7) आईने से खफा रहने लगी हूँ मैँ
जिसके लिए सवरती थी वो नज़र है अब कहाँ

8) दिन के उजाले तो पर्दा डाल देते हें मेरी तन्हाई पर
बस ये रातें बेवफा हो जाती हैँ

8 Comments

  1. Manjusha 01/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" 01/07/2016
  3. babucm 01/07/2016
  4. Amar Chandratrai 01/07/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 01/07/2016
  6. sarvajit singh 01/07/2016
  7. mani 01/07/2016

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