उलझन – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

उलझन

बहुत ही उलझन सी हो गयी है
अपनी मोहब्बत भरी ज़िंदगी में
ना जाने क्यूँ वो बार बार रूठ जाते हैं
मुझे बार बार मनाना पड़ता है
अब अपने दर्दे दिल की दास्तां
क्या बयां करूँ मैं दोस्तों
आजकल तो हर रोज़ सुबह शाम
उनका कुत्ता भी घुमाना पड़ता है

शायर : सर्वजीत सिंह
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26 Comments

  1. mani 01/07/2016
    • sarvajit singh 01/07/2016
  2. आदित्‍य 01/07/2016
    • sarvajit singh 01/07/2016
  3. Shishir "Madhukar" 01/07/2016
    • sarvajit singh 01/07/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 01/07/2016
    • sarvajit singh 01/07/2016
  5. Ankita Anshu 01/07/2016
    • sarvajit singh 01/07/2016
  6. Laljee Singh yadav 01/07/2016
    • sarvajit singh 01/07/2016
  7. C.m.sharma(babbu) 01/07/2016
    • sarvajit singh 01/07/2016
  8. अकिंत कुमार तिवारी 01/07/2016
    • sarvajit singh 02/07/2016
    • sarvajit singh 02/07/2016
  9. Amar Chandratrai 02/07/2016
    • sarvajit singh 02/07/2016
  10. sarvajit singh 02/07/2016
  11. Dr Swati Gupta 02/07/2016
    • sarvajit singh 02/07/2016
  12. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/07/2016
  13. sarvajit singh 03/07/2016

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