मिली यूँ नज़रों से नज़र

महफिलों में मिली यूँ नज़रों से नज़र
एक सितम पे ये दिल अब तेरा हो गया

तीर नज़रों से यूँ तुने मारा मुझे
में उसी ज़ख्म से अब घायल हो गया

मुलाकातों के दौर अब बढनें लेगे़
क्‍या खबर रात की कब दिन हो गया

क्‍या इबादत करू कुछ पता ना चले
हर दुवां मेरी अब तू ही बन गयी

इश्‍क के रंग में प्‍यार चढ सा गया
काली रातें भी अब चांदनी बन गयी
@:-(अभिषेक शर्मा)

22 Comments

  1. mani 30/06/2016
  2. Shishir "Madhukar" 30/06/2016
  3. Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 30/06/2016
  4. babucm 30/06/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 30/06/2016
  6. अकिंत कुमार तिवारी 30/06/2016
  7. sarvajit singh 30/06/2016
  8. Dr Swati Gupta 01/07/2016
  9. RAJEEV GUPTA 01/07/2016
  10. Amar chandratrai Pandey 01/07/2016

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