आतंकी (Inspired by today Turkey blast )

चलो आज एक तमाशा और सही ,
मजहबी खून खराबा और सही ,
चाहे तुर्की हो या भारत महान
कुछ नस्लों का खात्मा और सही ,

मुझे फर्क क्या पड़ता है इन् चीखो से
मेरे तन पे बंधे हत्यारों से ,……….
मेरी आत्मा के सच्चे श्लोको से
और उन मासूम सवालो से …..

चलो एक दर्द का मंज़र और सही
कुछ शोक सभा और सही …..
खून से सने इन् फर्शो पर…..
कुछ बिखरी लशे और सही …..

में खुद अपनी आत्मा को मार चूका
अब कुछ और खतए और सही….
मेरा मज़हब…. मेरा जूनून……
मेरे खुदा के नाम पर कत्लो की कतारे और सही …

पूरी दुनिया में हो मातम …..
मेरा कहर ही ऐसा है …..
में हूँ आतंकी ज़माने में …..
मेरा नाम ही को खोुोफ जैसा है …..

न छोड़ो , मुझको जिन्दा , में नफरत के जैसा हूँ
जो जिन्दा हूँ तोह मौत के साये के जैसा हूँ …

11 Comments

  1. सोनित 29/06/2016
  2. babucm 29/06/2016
    • tamanna 29/06/2016
  3. Amar Chandratrai 29/06/2016
    • tamanna 29/06/2016
  4. Shishir "Madhukar" 29/06/2016
    • tamanna 29/06/2016
    • tamanna 29/06/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 29/06/2016
    • tamanna 29/06/2016

Leave a Reply